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पितृपक्ष में श्राद्ध करने के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान, श्राद्ध रह जाता है अधूरा

जब भादो का महीना समाप्त होता है तो उसके साथ-साथ पितृपक्ष की भी शुरुआत हो जाती है, इस वर्ष पितृपक्ष 13 सितंबर से आरंभ हो रहा है, इस समय के दौरान सभी लोग अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पण करते हैं, इस समय के दौरान पवित्र स्थानों पर जाकर पिंड दान आदि किया जाता है, ऐसा बताया जाता है कि अगर पितृपक्ष के दिनों में अपने पूर्वजों का श्राद्ध किया जाए तो इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है, उनकी आत्मा इधर-उधर नहीं भटकती, उनकी आत्मा मुक्त हो जाती है, इसके अलावा श्राद्ध करने से हमको अपने पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है।

जिस तिथि को आपके पूर्वज इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गए हैं उसी दिन श्राद्ध करना चाहिए, इससे पितरों की कृपा दृष्टि आप के ऊपर बनी रहती है लेकिन पितृ पक्ष में अगर आप श्राद्ध कर रहे हैं तो उस समय के दौरान आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि अगर आपने इस समय के दौरान कोई भी गलती की तो इसकी वजह से आपके पितर नाराज हो जाते हैं, जिसके कारण आपके जीवन में बहुत सी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं,

आज हम आपको पित्र पक्ष में किन-किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं।

पितृपक्ष में श्राद्ध करने के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि श्राद्ध के समय आप कोई भी शुभ कार्य ना करें, आप पितृपक्ष के दौरान विवाह, घर खरीदना या सोने चांदी जैसे आभूषण या कार आदि की खरीदारी करने से दूर रहे।
  • आपको पितृ पक्ष में इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप अपने घर से किसी को भी पानी पिए बिना वापस मत जाने दीजिए, अगर आपसे कोई भी व्यक्ति पानी मांगता है तो आप पानी के साथ साथ उसको कुछ मीठा भी जरूर दीजिए, मान्यता अनुसार पितृपक्ष के दिनों में आपके पितर किसी न किसी रूप में आपसे अन्न ग्रहण करने के लिए पृथ्वी पर आते हैं, इसलिए हो सकता है कि जो व्यक्ति आपसे पानी मांग रहा है उसी रूप में आपके पितर आए हो।
  • अगर आप श्राद्ध कर रहे हैं तो आप गाय, कुत्ते, बिल्ली, कौवा को श्राद्ध का खाना अवश्य दीजिए, क्योंकि इनको पितर का ही रूप माना जाता है।
  • पितृपक्ष में आप मांसा-हार या तामसिक चीजों का सेवन मत कीजिए, इन दिनों आप कोई भी नशा ना करें और ना ही घर के अंदर किसी प्रकार की अशांति फैलाएं, पितृ पक्ष में हमेशा सादा भोजन करना चाहिए।
  • अगर आप पितृपक्ष में कुछ भी भोजन बनाते हैं तो उसका एक हिस्सा अपने पितरों के लिए अवश्य निकाल दीजिए, उसके बाद जो भोजन आपने निकाला है उसको आप गाय, कुत्ता या कौवा को खिला सकते हैं।

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