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धर्म से ही नहीं बल्कि आयुर्वेद से भी है रूद्राक्ष का गहरा संबंध, जानें कैसे

रुद्राक्ष का महत्व हिंदू धर्म में काफी ज्यादा ही महत्वपूर्ण है, जी हां, रूद्राक्ष का संबंध भगवान शिव से है। रुद्राक्ष यानि रुद्र+अक्ष, रुद्र मानें भगवान शंकर और अक्ष माने आंसू। कहा जाता है कि रूद्राक्ष का निर्माण भगवान शिव के आंसू से ही हुआ है, माना जाता है कि भगवान शिव की आंखों से पानी की कुछ बूंदें जब धरती पर गिरी तो इससे रुद्राक्ष का जन्म हुआ और फिर इसके बाद भगवान शिव की आज्ञा से पेड़ों पर रुद्राक्ष फलों के रूप में प्रकट हो गए।

शास्त्रों के अनुसार रूद्राक्ष को आभूषण, संरक्षण, ग्रहों की शांति और आध्यात्मिक लाभ के रूप में प्रयोग किया जाता है। बताया गया है कि कुल 17 प्रकार के रूद्राक्ष होते हैं लेकिन इनमें से केवल 11 प्रकार के रूद्राक्ष का उपयोग ही विशेष प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा माना जाता है कि शिवजी के प्रिय रूद्राक्ष को अगर कोई व्यक्ति धारण करता है तो उसके सभी दुःख दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

आयुर्वेद व रुद्राक्ष का है गहरा संबंध

रुद्राक्ष को चंद्रमा का कारक रत्न माना गया है इसलिए एकाग्रता के लिए भी इसे पहना जाता है। पर शायद आपको ये नहीं पता होगा कि रूद्राक्ष का महत्व जितना धर्म में हैं उतना ही आयुर्वेद में भी है। जी हां आपको बता दें कि आयुर्वेद में कहा गया है कि रुद्राक्ष एक तरह का फल है। इसमें इतने सारे औषधीय गुण होते हैं जो कि कई बिमारियों को दूर करने की क्षमता रखते हैं।

बताया जाता है कि रुद्राक्ष को धारण करने से या इसे पानी में कुछ घंटे रखकर उस पानी को ग्रहण करने से दिल से संबंधित बीमारियां दूर होती है व मानसिक रोगों के साथ ही नसों से जुड़े रोग भी खत्म होते हैं। इसके साथ ही साथ इससे याददाश्त में भी बढ़ोतरी होती है।

आयुर्वेद की माने तो रूद्राक्ष में लोहा, जस्ता, निकल, मैंगनीज, एल्यूमिनियम, फास्फोरस, कैल्शियम, कोबाल्ट, पोटैशियम, सोडियम, सिलिका, गंधक जैसे अन्य तत्व पाएं जाते हैं। जिसकी वजह से ये लकड़ी का होने के बावजूद अपने भीतरी घनत्व के कारण पानी में डूब जाता है। विज्ञान की भाषा में रुद्राक्ष के दानों में गैसीय तत्व है इसमें ताबा कोबाल्ट ताबा आयरन की मात्रा भी होती है। यही कारण है कि शरीर के विभिन्न हिस्सों के लिए रूद्राक्ष का लाभ अलग अलग होता है।

कहा जाता है कि रुद्राक्ष को शुद्ध जल में तीन घंटे रखकर उसका पानी किसी अन्य पात्र में निकालकर, पहले निकाले गए पानी को पीने से बेचैनी, घबराहट, मिचली व आंखों का जलन शांत हो जाता है। इसके अलावा दो बूंद रुद्राक्ष का जल दोनों कानों में डालने से सिरदर्द में आराम मिलता है। रुद्राक्ष का जल हृदय रोग के लिए भी लाभकारी है। इतना ही नहीं रूद्राक्ष के इस जल का चरणामृत की तरह हर रोज दो घूंट जल को पीने से शरीर स्वस्थ रहता है।

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