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इस बार रविवार के दिन पड़ रहा है प्रदोष, इस व्रत को करने से सभी कष्ट हो जाते हैं दूर

हर व्यक्ति चाहता है कि उसपर भगवान की कृपा बनी रहे लेकिन कई बार ऐसा संभव नहीं हो पाता है। जिस भी व्यक्ति पर भगवान की कृपा बनी होती है उसके सभी दोष को भगवान माफ कर देते हें। वहीं बात करें प्रदोष काल की तो ये माह में दो बार यानी शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष की बारस अथवा तेरस को आता है। प्रदोष का व्रत एवं उपवास भगवान सदाशिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। प्रदोष का सबसे बड़ा महत्व है कि सोम (चंद्र) को, कृष्णपक्ष में प्रदोषकाल पर्व पर भगवान शंकर ने अपने मस्तक पर धारण किया था। यह सोम प्रदोष के नाम से जाना जाता है।

अगर आप भी चाहते हैं कि आप पर भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा आपपर बनी रहे तो आपको प्रदोष व्रत जरूर करना चाहिए। इस बार प्रदोष व्रत 14 जुलाई यानि रविवार को है। रविवार को प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसका महत्व और भी ज्यादा खास हो गया है। रविवार के दिन इस व्रत को करने से व्यक्ति सदा निरोगी रहता है और उसे लंबी आयु मिलती है। प्रदोष व्रत करने वाले व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

व्रत का महत्व

वैसे तो शास्त्रों में इस व्रत का काफी ज्यादा महत्व बताया गया है जिसमें कहा गया है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को दो गायों के दान के बराबर पुण्य के फल की प्राप्ति होती है। इसे करने से व्यक्ति के सभी तरह के आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं। इतना ही नहीं माना जाता है कि इस तरह के व्रत को करने से भोलेनाथ की कृपा से आपके जीवन में हर तरह के अभाव दूर हो जाते है।

दरिद्रता हो जाती है दूर

अगर आपको किसी भी तरह की धन समस्या है या फिर कर्ज का भार है तो ये व्रत आपके लिए सबसे उत्तम है। जी हां दु:खी व संसार की पीड़ा से व्यथित मनुष्यों के लिए प्रदोष पूजा बेहद ही शुभ फल प्रदान करती है। कहा जाता है कि यदि दरिद्र व्यक्ति प्रदोष काल में भगवान गौरीशंकर की आराधना करता है तो वह धनी हो जाता है और यदि राजा प्रदोष काल में शिवजी की प्रार्थना करता है तो उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है, वह सदैव निरोग रहता है, एवं राजकोष की वृद्धि व सेना की बढ़ोत्तरी होती है।

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